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लक्ष्य की मेहनत

लक्ष्य की मेहनत  (कविता)

शिक्षक ने गौर किया
एक दिन शिष्य के लक्ष्य पे,
शिष्य की मेहनत लक्ष्य से
सामना कर रही है,
लक्ष्य मेहनत को उलटा धकेल रहा है,
नया प्रयास और नई लगन के साथ,
फिर लक्ष्य से सामना करने के लिए।

शिक्षक ने सोचा --
लक्ष्य न हो तो
इन मेहनत का क्या होगा?
प्रयास मर जायेगा,
लगन मर जायेगी,
इनके सपने टूट जायेंगे,
क्योंकि
मेहनत ही उनको प्रेरित करती है,
लक्ष्य से फिर सामना करने के लिए।
  
                 -: मदन लाल सोलेवाल

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