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सितंबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मैं सड़क हूँ!

मैं सड़क हूँ! (कविता) असंख्य राहगीर मुझसे मोहब्बत करते है कहीं अनन्त और कहीं कुछ पहर, लेहजा मैं भी मोहब्बत करती हूँ उनके लिए जो है हमसफर। इसलिए मैं सड़क हूँ! - : मदन लाल सोलेवाल

कौन महादेश से आयी पाखी?

कौन महादेश से आयी पाखी? (कविता) कौन महादेश से आयी पाखी? कौन महादेश को जायेगी? बसंत का सौरभ लेके आयी, पँतझड़ की इस दुँनिया को फिर से यह बसायेगी! कौन महादेश से आयी पाखी? कौन महादेश क...