मैं सड़क हूँ! (कविता)
असंख्य राहगीर
मुझसे मोहब्बत करते है
कहीं अनन्त
और कहीं कुछ पहर,
लेहजा
मैं भी मोहब्बत करती हूँ
उनके लिए
जो है हमसफर।
इसलिए
मैं सड़क हूँ!
-: मदन लाल सोलेवाल
मैं सड़क हूँ! (कविता)
असंख्य राहगीर
मुझसे मोहब्बत करते है
कहीं अनन्त
और कहीं कुछ पहर,
लेहजा
मैं भी मोहब्बत करती हूँ
उनके लिए
जो है हमसफर।
इसलिए
मैं सड़क हूँ!
-: मदन लाल सोलेवाल
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें